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प्यार के कागज़ पे, दिल की कलम से…. ख़त मैंने ‘ ए. बच्चन’ के नाम नाम लिखा…

11 ઓક્ટોબર

 

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स्वजन श्री अमिताभ बच्चन,

जहां पे रोज सुबह मीडिया सेलिब्रिटियों का ‘मास प्रोड्क्शन’ करता है, वहां स्वाभाविक तौर से गार्बेज की डस्टबीन भी बड़ी होती है. उसमे एक ही सुखद अपवाद है, गगनचुंबी ऊंचाईयों को छूनेवाली अज्जीमोशान शख्सियत – एक परदे के आगे और परदे के पीछे दोनों जगह पे “सुपरहीरो’ – अनमोल, असामान्य, अभूतपूर्व, अविनाशी, अद्भूत इन्सान – अमिताभ बच्चन.

आप को जब व्यथा होती है, तो उसकी वेदना सारे देश में होती है. क्यूंकि जीवन की आपाधापीमें आप हमारा विश्राम है.

ये प्रेमपत्र नहीं, है पार्थना भी नहीं है. ये है – ‘थेंक्स गिविंग’ ! आभारप्रदर्शन. इस पत्र में आप को किया गया संबोधन केवल औपचारिक नहीं है. इस देश के और बहार के भी लाखों – करोडों एसे परिवार है, जिन के लिए आप उन के पारिवारिक सदस्य है. पुत्र, पिता, बंधु, सखा, आदर्श, गुरु कितने ही रूप में हमने आप को चाहा और सराहा है, अपने कुटुंब का एक स्वजन माना है. ये केवल कोई सुपरस्टार अभिनेता होने की वजह से नहीं है. ये है आप के वजूद की वजह से.

और आप ने भी हमारी कम कद्र नहीं की है. ‘केबीसी’ में मधुर मुस्कान और जोशीली जबान से आप जब सब का अभिवादन करते हो, तब आप की आंखोमें आप के ये “एक्सटेन्डेड फेमिली’ के लिए रुणस्वीकार का आदर और प्यार भरा स्नेह दिखाई देता है. ये अभिनय से नहीं आता. ये आता है आप के बड़े बुजुर्गो के संस्कार से.

आप हे, तो हम है. आप की फिल्मोंने एक बच्चे को गुजरात के छोटे से गाँव में दक्षिण ध्रुव के चुम्बकीय ध्रुव की  तरह छुआ. अपनी इकलौती संतान को घर पे पढाने कृतसंकल्प मेरे शिक्षक मातापिताने हर रोज एक किताब चोकलेट के बजाय बच्चे को देने का संकल्प किया. उस के खर्च के लिए मेरी स्वर्गस्थ माँ ने कभी गहने न पहन के पुस्तक लेने की प्रतिज्ञा की. मुझे आज भी याद है, उन की केंसर की बीमारीमें मै उन को मुंबई ले आया था और थोडा घुमा रहा था तो आप के घर को बहार से देख के उन की आंखोमे आई हुइ वो बिजली सी चमक. मेरे मितभाषी पिताजीने आप की वक्तृत्व कला की मिसाले मुझे दी.

लेकिन वो फिल्में कम देखते थे, मैंने तो थोडा बड़ा होने के बाद गाँव के एक मेले में “शोले” पहली बार देखी, और आप से सम्मोहित , वशीभूत हो गया. वहां से संसार की सब कलाओ का संगमतीर्थ सिनेमा मेरी मा हो गया, और मैंने पूज्य मोरारिबापूने जब मुजे ‘सिनेमा’ पर व्याख्यान देने के लिए अपने यहाँ बुलाया तब मंच से कहा “ मेरी कुंडलिनी हिमालय में नहीं, थिएटर में जागृत होती है !” इस का यश आप के जादू को है.

आप न होते तो मेरे जैसे कितनों को कभी सिनेमा से इश्क न होता. तो फिर फीलिंग को एक्सप्रेस करने की तमन्ना न होती. किसी की धडकन को छूने के लिए शब्द और विचारों की अभिव्यक्ति न मिलती. फिर बगैर कागज़ के नानाविध विषय पर बोलने और जिन्दगी की मधुशाला के बारे में लिखने की प्रेरणा इतनी न मिलती की प्रिन्सिपाल की नौकरी छोड़ के कलम के सहारे जीना २८ साल की उम्र से शरु कर दिया ! आप की मुलाकातें पढने के लिए अंग्रेजी पत्रिकाए पढ़ कर अंग्रेजी सीखी, आप से ही तो बिना हिन्दी की पढाई किये हुए फिल्में देख के ये हिन्दी सीखी.

आप मेरी प्रेरणा रहे, व्यक्तित्व में, अभिव्यक्ति में, एवं माता-पिता को अतुल्य रूप से सपर्पित प्रेम करने वाले अभिनव सन्तान के रूप में ! पुराने मित्र जब अलग हो जाये तो उनके विषैले द्वेष के प्रति संयमित मौन सीखाने के लिए. न जाने जीवन के कितने घंटो को आप के बारे में सोचते हुए, आप के स्वास्थ्य और सफलता की कामना में बीता दिया, और यहाँ पे ही सार्थकता का निर्वाण अनुभव किया.

इन्सान सब से सुखी, प्रसन्न कब होता है ? जब वो अपने अप को भूल इस प्रकृति की सर्जकता में खो जाए. खुद को भूलना ही परम मोक्ष, सत चित आनन्द है. क्रिकेट का मेच हो या महोब्बत के वो नजदीकी ( इन्टीमेट ) लम्हें – स्वव को जब भूल जाते है, तब वो अनुभव रुचिकर रहेता है. हमारा मन हर बार नया अनुभव तलाशता है, और हमारा तन हर बार पुराने अनुभव का पुनरावर्तन चाहता है.

आप ने वो दोनों दिए ! अपने करिश्माई अभिनय और सज्ज अनुशासन से : नये का रोमांच, पुराने की गरिमा. शांति और आनन्द के लिए लोग लास वेगास से रुषिकेश तक जाते है, पैसा और प्रतिष्ठा; सत्ता और सौन्दर्य सब कुछ मिलने के बाद उन को चाहिए कुछ इसे पल जिन में वो सब भूल के खो जाए.

और बच्चनजी, आप का सब से बड़ा स्थान इस लिए नहीं है, की आप को स्टार ऑफ़ ध मिलेनियम का खिताब मिला या मैडम तुसों का पुतला बना, या करोड़ो तालीयों के करतलध्वनि का गुंजारव हुआ या सुर्खियों की रौशनी आप पर अलौकिक रूप से ४५ साल से ज्यादा बनी रही.

वो इस लिए है की आप ने हमें अपने दर्द को भूल कर, मरते दम तक भूल न सके इतने बेसुमार पल दिए रंजन एवं सर्जन के ! आप परदे पे हसें, और हम मुस्कुराए, आप रोये और हमारी आंखोमे नमी सी छा गई. आप विचलित हुए और हम आहत हुए, आपने गाया और आप नाचे तो हम भी कदम-ब-कदम थिरकने लगे. आप की आंखोमे फौलाद को पीघालने वाला गुस्सा दिखाई दिया, और हमारी रीढ़ की हड्डीमें कंपन आ गया !

प्रतिभा और प्रभाव की जिन्दा व्याख्या क्या होती है, वो आप से ही पुरे देश की तीन पीढियोंने सीखा ! शिखर की चोटी पर पहुँच कर और सदैव वहां टिक कर भी आभिजात्य और अच्छाई को कम नहीं करना चाहिए, बल्कि बढ़ाना चाहिए वो आपने उपदेश नहीं, आचरण से सीखाया.

आप की चिंता हम जैसे करोडों चाहनेवालो को इस लिए है, की हमें अपनी चिंता है. आप के बिना जीना भी क्या जीना है ? हम फिल्मे देख के आप की प्रशंसा करते हुए मोबाइल की बटरी और बेलेंस खो देते है, क्योंकि हम ने आप को पाया है और आप से पाया है. और संसार उन्हें ही याद रखता है , जिन्होंने दुःख सहा, और सुख बांटा. कुछ लिया. मुंबई हजारो खरबपतियों के बड़े बड़े महल है, लेकिन आज भी सालों से से भीड़ आप के घर के सामने है, क्यूंकि आपने बहुत कुछ दिया है हम को. अभी भी दे रहे है.

इस लिए, अगर महात्मा गांधी ‘राष्ट्रपिता’ है, तो आप ‘राष्ट्रपुत्र’ है. आप का घर , आप का परिवार राष्ट्रीय एकता की अनोखी मिसाल है. आप के परिवार में तो चार लोगों के बीच छे पद्म सम्मान है. लेकिन ये सम्मान आप के लिए जागने वाली जनता के ह्रदय से आया है. हर धर्म , हर प्रान्त, हर जाति को आपने जोड़ के रखा हुआ है, उन का अटूट विश्वास जीता हुआ है.

आप चलते है, तो दिल दहलते है वो पर्सोना देख के, इतनी बुलंद आवाज़ के बावजूद आप खामोशी से वो बयां करते है , जो शब्दों से महेसूस नहीं होता. आपने लड़ना सीखाया, और आज आप ने उम्र को करा कर जीना भी सीखाया. आप से आधी उम्र के लोग आप उन से दुगनी उम्र में जितना काम करते हो, उसका आधा भी नहीं कर पाते ! वो भी इतनी परफेक्शन और पेशन से.

तेजोद्वेष से मुल्यांकन विवेचक करते है, क्योंकि प्रसिद्ध व्यक्तित्व की आलोचना कर के चाँद लम्हों की प्रसिध्धि मिल जाती है. लेकिन सिध्धि के लिए तो जीवन के यज्ञ में अपने आप की आहूति हर रोज देनी पड़ती है. जिन्दगी इम्तिहान लेती है. लेकिन मुकद्दर का सिकन्दर वाही है जो हर कदम पे आंसुओ की नई ज़ंजीर को अंदर छिपा के साजे गम पर ख़ुशी के गीत गाता फिरे हरदम.

आज भारत की युवा पीढ़ी सब से ज्यादा हताश हो के जरा सी विफलता में आत्महत्या की हताश सोच रखती है, तब आप का जीवनसंग्राम उन के लिए एक आदर्श है. जीवन के हर चक्रवात का, आपने हँसते हुए मुकाबला किया. संजोगो के प्रवाह के सामने मौन रह कर मेहनत से ललकार की, और पराक्रम दिखाया. आप हमेशा किस न किसी मुसीबात से लड़ते रहे, और जीतते रहे. और हमें जताते रहे – जीवन में हार कहाँ है ? या तो जीत है, या फिर नई कोई सीख है. ये है महानायक. प्रभुकृपा से आप का पर्दे पे ही नहीं, जीवन में भी दूसरा नाम ‘विजय’ है.

आप आज भी पारसमणि है, जो सिर्फ अपने होने से जीवन को कंचन बना देते है. आप ने बाबूजी वो कविता के अनुपम शब्दों को प्राण दिया है : मैंने जीवन देखा, जीवन का गान किया. मैं कभी, कहीं पर सफ़र खत्‍म कर देने को तैयार सदा था,  इसमें भी थी क्‍या मुश्किल; चलना ही जिका काम रहा हो – दुनिया में हर एक क़दम के ऊपर है उसकी मंजिल !

परमात्मा से पार्थना यही है, आप की रग रग में ऐसा ही “एवर-यंग” लावा उर्जा से सराबोर प्रकाशित रहे, आप की जुल्फों से प्यार रहा, आप की  तरह ज़ुर्रियो को भी नमस्कार है. जीवन को ज्यादा पहनने से आई सिलवटें आप की चिर परिचित स्मित और मक्कम मुखमुद्रामें आप को फिर छोरा गंगा किनारेवाला बना देती है. मौत को बहुत बार आपने जीने के अंदाज़ सीखाये है, इस लिए भी आप को लोग शंहशाह कहते है !

आप ने एक बार लिखा था, किस तरह आप की माताजी प्रभातमें ताजे शबनमी पुष्पों से आप का घर प्रसन्न रखती थी. आप को देख के, सुन के, पढ़ के, आप के बारे में सोच के, आप के कोई पोस्टर को भी देख के ऐसी ही मधुमय खुशबू गुजरात की ही तरह हमारा मन आंगन महेकाती रहे.

गुजराती अखबार में लिखने की वजह से आप के प्रति ये स्नेह और आप की फिल्में या ज्ञान की बाते लाखों पाठको तक बार बार पहुंचाई, एक लेखक को स्वप्नवत लगे इतने चाहकों का स्नेह पाया, आप की वजह से यार दोस्त मिले – लेकिन आप तक ये बाते पहुंचा न पाया…

एसा आप का एक फैन नहीं, एयरकंडीशन्र – वो भी टर्बो पावर और मेगाटन वाला.

जय.

( तसवीर : मेधा दीपक अंतानी )

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5 responses to “प्यार के कागज़ पे, दिल की कलम से…. ख़त मैंने ‘ ए. बच्चन’ के नाम नाम लिखा…

  1. Madhuri

    ઓક્ટોબર 11, 2018 at 2:22 પી એમ(PM)

    andar j ghusi javu tu ne. pure puru.. big B ni good book ma entry melavava mate..dont leak enter it fully dear…

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  2. Hetal patel

    ઓક્ટોબર 11, 2018 at 2:39 પી એમ(PM)

    As same many people inspire by you.gr8 artical attribute to BigB.

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  3. ankit sadariya

    ઓક્ટોબર 11, 2018 at 4:32 પી એમ(PM)

    વાહ જોરદાર …બચ્ચનને મળવાનું સદભાગ્ય મળી જ ગયું.

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  4. Jagdish

    ઓક્ટોબર 21, 2018 at 1:03 પી એમ(PM)

    what a great movement to meet Century’s Maha Nayak Shree Amitabhji

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  5. Dilip Patel

    ઓક્ટોબર 30, 2018 at 12:47 પી એમ(PM)

    very nice sir…my dream also to meet mr.amitabh bachhan sir…aapne e avasar malyo ..aape khub saras lakhyu che….

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